गोस्वामी तुलसीदास - प्रचलित कथायें एवं विशिष्टाएँ

ऐसा माना जाता है कि तुलसीदास जी वाल्मीकि के अवतार हैं| हिंदू मान्याताओं के अनुसार आत्मा अमर है| वाल्मीकि ने "रामायण" की रचना की थी और उसका पाठ करके लंबे अंतराल तक हिंदू एक सूत्र में बंधते रहे| मैं समझता हूँ कि कालान्तर में संस्कृत भाषा का ह्रास हो जाने के कारण "रामायण" का प्रभाव क्षीण होने लगा होगा तब वाल्मीकि को "रामायण" का रूपांतर "रामचरितमानस" के रूप में करने के लिये तुलसीदास के रूप में अवतार लेना पड़ा होगा|
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